सफर ख्वाबों का........

मासूम ख्वाहिशें खुद से खुदा से

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कुछ खामोश से अरमान

Posted On: 16 Jul, 2011 Others में

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बंद किवाड़ो के पीछे से

कुछ खामोश से अरमान मचलते  है
कुण्डी लगे खुले आसमानों में
पर फैलाने को
ख्वाब तरसते  है
कतरे कतरे बुने है ख्वाब
मगर ख्वाहिशो के इस जंगल में
चिंदी चिंदी वो उधड़ते है
सजते है फिर वो नयी
दुल्हन कि तरह
इंतजार में किसी के
हर आहट पर चौंकते है
फिर चुपके से किसी कोने में जा
दुबकते है सहमते है सिसकते है
बंद किवाड़ो के पीछे
कुछ खामोश  से अरमान मचलते  है
कभी नए फंदों में बुनकर
आँखों में झिलमिल करते है
कभी आजाद परिंदे कि तरह
नील  गगन में उड़ते है
कभी किसी बादल में बैठ
ख़ामोशी का मंजर तकते है
और तेज झोंको के संग
आवारा से वो फिरते हैं
बंद किवाड़ो के पीछे से
कुछ खामोश  से अरमान मचलते  है
कभी किसी मासूम बच्चे से हो ख़्वाब मेरे
अजब अठखेली करते है
दौड़ते है वो बेतहाशा
और कुछ देर थम के
सांसो को मेरी बोझल करते है
बंद किवाड़ो के पीछे से
कुछ खामोश से अरमान मचलते  है

फ्त्य्य्म्क्क




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12 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Nikhil के द्वारा
August 3, 2011

नंदिनी जी, अब आपकी इस रचना के बारे में क्या कहूं. बहुत सुन्दर, मनमोहक और ह्रदय-स्पर्शी.

    नंदिनी के द्वारा
    August 4, 2011

    निखिल जी , सराहना के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद..|

chaatak के द्वारा
August 3, 2011

संक्षिप्त में सिर्फ इतना कहना चाहूंगा कि जागरण जंक्शन के मंच पर एक और परिपक्व कवियित्री का पदार्पण हो चुका है| स्वागत है!

    नंदिनी के द्वारा
    August 4, 2011

    चातक जी, आपके प्रोत्साहन से और भी अच्छा करने का जज़्बा बना है| आपका बहुत शुक्रिया|

संदीप कौशिक के द्वारा
July 22, 2011

बहुत सुंदर कृति नंदिनी जी…..दिल को गहरे तक छू लेने वाली ! हार्दिक बधाई आपको…. :)

    नंदिनी के द्वारा
    August 2, 2011

    संदीप जी, आपका बहुत बहुत धन्यवाद इस प्रतिक्रिया के लिए|

nishamittal के द्वारा
July 18, 2011

नन्दिन इ जी मैंने आपकी पहली रचना पढी है,बहुत सुन्दर रचना और भाव.बधाई.

    नंदिनी के द्वारा
    August 2, 2011

    आदरणीया निशा  जी, आप जैसी वरिष्ठ ब्लॉगर से मिलने वाली सराहना अपनेआप में किसी पुरस्कार से कम नहीं है| सहृदय आभारऑ

surendr shukl bhramar5 के द्वारा
July 18, 2011

नंदिनी जी बहुत खूब -सुन्दर मूल भाव -काश उन्हें आजादी दी जाये कुण्डी खुले और अरमान पुरे हों पंख फैलाये आसमान में उड़ें – बधाई हो – वाहिद भाई के जज्बातों का मई भी समर्थन करता हूँ -अभिनन्दन है आप का लिखते रहिये ..देर है अंधेर नहीं … कभी किसी मासूम बच्चे से हो ख़्वाब मेरे अजब अठखेली करते है दौड़ते है वो बेतहाशा और कुछ देर थम के सांसो को मेरी बोझल करते है शुक्ल भ्रमर ५

    नंदिनी के द्वारा
    August 2, 2011

    आदरणीय भ्रमर जी, आपका बहुत बहुत शुक्रिया मेरी कविता की सराहना के लिए| धन्यवाद|

वाहिद काशीवासी के द्वारा
July 18, 2011

नंदिनी जी, आपकी पहली कविता पढ़ी बहुत अच्छी लगी थी और आज आपने अपनी दूसरी रचना से ये साबित कर दिया है कि आप यूँ ही कोई नहीं हैं बल्कि आप भावना प्रधान कवियित्री हैं| अंतस के ज्वार भाटा और उफान को आपने बहुत ही सुन्दरता के साथ शब्दों के मोतियों में पिरोया है| मैं हैरान हूँ कि आपकी किसी भी कविता को फीचर्ड क्यूँ नहीं किया गया| जागरण जंक्शन नए लेखकों/लेखिकाओं कवियों/कवियित्रियों के प्रति अपने कहे गए व्यवहार से पीछे क्यूँ हट रहा है मेरी समझ से परे है| आपकी कवितायेँ निश्चय ही फीचर्ड किये जाने लायक हैं और ये बात मैं ही नहीं कोई भी बौद्धिक ब्लॉगर कहने से चूकेगा नहीं| भविष्य के लिए शुभकामनाओं के साथ… आभार,

    नंदिनी के द्वारा
    August 2, 2011

    वाहिद जी, आपसे प्रोत्साहन मिला तो अच्छा लगा| ये फीचर्ड इत्यादि मेरी समझ से बाहर है| अभी नई नई हूँ इसलिए ये सब नहीं जानती पर आप लोगों के सानिध्य में ज़रूर सीख जाउंगी| ह्रदय से आभार व्यक्त करती हूँ आपकी सराहना के लिए|


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