सफर ख्वाबों का........

मासूम ख्वाहिशें खुद से खुदा से

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इसी का नाम ज़िंदगी

Posted On: 31 Jan, 2012 में

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कभी घेरा दुखों ने और

कभी यूँ ही मिली ख़ुशी

यही समय, यही चलन

इसी का नाम ज़िंदगी

कहीं पथरीले रास्ते

कहीं काँटों की थी डगर

थे कितने रोड़े राह में

नहीं रुके कहीं मगर

जो रुक गए तो कुछ नहीं

है चलना ही रवानगी

इसी का नाम ज़िंदगी

कड़ी थी धूप भी कभी

कहीं छाया थी पेड़ों की

यूँ ही बढ़ते रहे बग़ैर

किये परवाह थपेड़ों की

कभी भाटा तो ज्वार भी

इसी का नाम ज़िंदगी



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11 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

dineshaastik के द्वारा
March 5, 2012

जीवन को परिभाषित करती सुन्दर रचना के लिये बधाई के साथ साथ होली के रंगीन पर्व पर हार्दिक शुभकामनाये। कृपया अपना समालोचात्मक प्रतिक्रिया से अनुग्रहीत करें- http://dineshaastik.jagranjunction.com/?p=60&preview=trueक्या सचमुच ईश्वर है (कुछ सवाल)

sadhana thakur के द्वारा
January 31, 2012

नंदिनी जी ,अच्छी रचना ,बधाई हो …….

    नंदिनी के द्वारा
    February 10, 2012

    शुक्रिया साधना जी

ANAND PRAVIN के द्वारा
January 31, 2012

वाह…………………………………………..बहुत शीतल आपकी कविता में एक वास्तविक मिठास है………………..बधाई कबूल करें

    नंदिनी के द्वारा
    January 31, 2012

    आपकी बधाई कबूल है। प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद। :-D

nishamittal के द्वारा
January 31, 2012

जिन्दगी के पहलुओं को बहुत सुन्दरता से बखाना है आपने.बधाई

    नंदिनी के द्वारा
    January 31, 2012

    हौसला अफज़ाई के लिए आपका बहुत शुक्रिया निशा जी।

induravisinghj के द्वारा
January 31, 2012

किये परवाह थपेड़ों की कभी भाटा तो ज्वार भी इसी का नाम ज़िंदगी… वाह बहुत खूब…

    नंदिनी के द्वारा
    January 31, 2012

    शुक्रिया इंदु जी| पहली बार आपकी टिप्पणी पा कर ख़ुशी हुई|

वाहिद काशीवासी के द्वारा
January 31, 2012

बहुत दिनों बाद आपकी कोई रचना पढ़ने को मिली। ज़िंदगी चलते रहने का ही नाम है और इस सफ़र के अलग-अलग पड़ावों को आपने बड़ी सुंदरता से दर्शाया है। साभार,

    नंदिनी के द्वारा
    January 31, 2012

    आपने हमेशा ही प्रोत्साहन दे कर मेरा हौसला बढ़ाया है वाहिद जी। शुक्रिया आपका :-)


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